आफताब ने श्रद्धा को मारकर किये उसके शव के 35 टुकड़े: पुलिस ने हल किया छह महीने पुराना मामला

दिल्ली से अत्यधिक दिल दहला देने वाला मामला सामने आ रहा है।  दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने एक अफताब नामक युवक को गिरफ्तार किया है जिसने अपनी प्रेमिका श्रद्धा की ह्त्या ही नहीं की बल्कि उसके शरीर के 35 टुकड़े किये और दिल्ली में कई जगहों पर फेंका।

यह समाचार दिल दहला देने वाला है क्योंकि यह हत्या साधारण नहीं है। हत्या के बाद जिस प्रकार से उसके शरीर के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के लिए योजना बनाई गयी वह स्तब्ध करने वाली है।

मीडिया के अनुसार श्रद्धा और अफताब की दोस्ती मुम्बई में एक कॉल सेंटर में हुई थी। दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदली और जब परिवार ने विरोध किया तो वह भागकर दिल्ली आ गए। श्रद्धा का संपर्क घरवालों से नहीं था, मगर घर वाले सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बेटी की जानकारी रखते थे। जब उन्हें मई में अपनी बेटी की सोशल मीडिया पर भी जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

मीडिया के अनुसार-

श्रद्धा के पिता ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी मुंबई के कॉल सेंटर में काम करती थी। यहां उसकी मुलाकात आफताब नाम के एक शख्स से हुई और दोनों की दोस्ती काफी नजदीकी में तब्दील हो गई। 

दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे लेकिन परिवार वाले इस बात से खुश नहीं थे जिसके चलते उन्होंने इसका विरोध किया। इसी विरोध के चलते उनकी बेटी और आफताब मुंबई छोड़कर दिल्ली आ गए और यहां पर छतरपुर इलाके में रहने लगे।

इसके बाद पुलिस ने आफ़ताब की तलाश आरम्भ की और फिर आफताब को गिरफ्त में लिया। पुलिस ने जब आफताब से पूछताछ की तो उसने कहा कि श्रद्धा उस पर शादी का दबाव डाल रही थी तो उसने श्रद्धा की हत्या कर दी और फिर उसके शरीर के पैंतीस टुकड़े किये! वह इसलिए जिससे पुलिस उसे पकड़ न सके।

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इसके लिए आफताब एक नया बड़ा फ्रिज खरीदकर लाया। 18 दिन तक वह रात को दो बजे शरीर के टुकड़े को एक-एक कर प्लास्टिक बैग में लेकर जाता था और फेंक कर आ जाता था।

इतनी बड़ी योजना, इतना बड़ा षड्यंत्र! यह घटना हिन्दू लड़कियों की आँखें खोलने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। परन्तु क्या ऐसा होगा, यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है। क्योंकि इस घटना के बाद भी मीडिया इसे केवल क़ानून व्यवस्था की समय बताएगा, और इसे इसी तरह से देखा जाएगा। परन्तु क्या यह समस्या केवल कानूनी है? क्या यह हत्या केवल इसलिए हुई कि कानून से न्याय देरी से मिलेगा या फिर इसकी मानसिकता पूरी तरह से मजहबी वर्चस्व पर है?

यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है!

लोग इस घटना को लेकर twitter पर भी स्तब्ध हैं

Mehrauli Police solved a 6-month-old case & arrested Aftab for killing Shraddha, chopping her into pieces & disposing them of.

Aftab trapped her while working in Mumbai & came here after families’ opposition. He murdered her when she started asking him to marry: Delhi Police.

— Arun Pudur 🇮🇳 (@arunpudur) November 14, 2022

इस घटना को लेकर अधिकारियों में भी गुस्सा है, उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ने कहा कि ऐसे लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम अर्थात नेशनल सेक्युरिटी एक्ट के अंतर्गत बुक किया जाना चाहिए

Six-month-old murder case solved by Delhi Police: Cops arrest the accused (Aftab) for killing a girl by chopping her into pieces.

Such a person (accused) should be booked under National Security Act also: Arvind Jain (former DGP, UP)@bhavatoshsingh with more details. pic.twitter.com/NIhIouA9sU

— TIMES NOW (@TimesNow) November 14, 2022

समस्या यह है कि जब हिन्दू अभिभावक अपने बच्चों को यह कहते हुए सचेत करते हैं कि उन्हें विवाह के सम्बन्ध में अपने अभिभावकों की बात सुननी चाहिए तो ऐसी कई प्रेम कहानियां मीडिया के माध्यम से हमारे बच्चों के दिमाग में डाली जाने लगती हैं जिनमें मुस्लिम युवक और हिन्दू लड़की बहुत प्यार से रह रहे हैं, जबकि ऐसा कितनी बात होता है और कितने प्रतिशत होता है, यह भी अपने आप में एक प्रश्न है।

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अभिभावको को मीडिया और साहित्य और यहाँ तक कि अकादमिक रूप से भी हिन्दू बच्चों का शत्रु घोषित किया जाने लगता है और यह प्रमाणित किया जाता है कि अभिभावक ही सबसे बड़े दुश्मन हैं। जबकि बच्चों के लिए आवश्यक है कि वह अपने अभिभावकों की बात सुने,।

Saying that Shraddha should have listened to her parents advice and not gone with Aftab is not “victim shaming”. Let’s put an end to this fake woke shit so we can actually save lives of kids.

Kids/youngsters – please listen to your parents. They have been through your age.

— Muthukumar IYER முத்துக்குமார் ஐயர்🇮🇳 (@MuthukumarRaj16) November 14, 2022

परन्तु यह भी है कि जो लड़की इनके जाल में फंसने से इंकार कर देती है उसे भी यह लोग मार डालते हैं, फिर चाहे वह झारखंड की अंकिता हो या फिर हरियाणा की निकिता तोमर! यह एक कहानी नहीं है और न ही श्रद्धा अंतिम होगी। इस समस्या की जड़ पर जाना होगा और इस दुस्साहस को भी पहचानना होगा जिसके चलते वह लोग हिन्दू लड़कियों की ह्त्या करने में हिचकते नहीं हैं।

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वह कौन सी ताकत है जो इस हद तक उन्हें प्रेरित कर देती है कि हिन्दू लड़कियों को जैसे भी फंसाओ और नहीं फंसे तो मार डालो, जैसे अंकिता और निकिता को मारा था और जो फंस जाए और शादी की बात करे तो भी मार डालो और मारकर ऐसा कर दो कि उसके मातापिता उसके शव के लिए भी तरस जाएं!

क्या कभी मीडिया इस दुस्साहस या बेशर्मी पर बहस करेगी?

(यह स्टोरी हिंदू पोस्ट का है और यहाँ साभार पुनर्प्रकाशित किया जा रहा है। )

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