डॉ. जे जे ईरानी को सेंटर फॉर एक्सेलेंस में श्रद्धांजलि दी गयी

जमशेदपुर: जमशेदपुर के सेंटर फॉर एक्सलेंस प्रांगण मे बुधवार को स्वर्गीय डॉ. जे. जे. ईरानी की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन टाटा स्टील द्वारा किया गया। इसमें टाटा स्टील के एम.डी. टी.वी. नरेन्द्रन के अलावा कई वरीय पदाधिकारी शामिल हुए।

स्वर्गीय जे.जे. ईरानी को स्टील मैन ऑफ़ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है।

86 वर्ष की आयु में विगत सोमवार की शाम उनका निधन हुआ।

देश ही नहीं विदेशों मे भी स्टील इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में उन्होंने अहम् योगदान दिया था।

उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा गया था।

Condolence meeting at CFE for Dr. J J Irani
श्रद्धांजलि सभा।

टाटा घराने को उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेवा दी थी।

उनकी श्रद्धांजलि सभा में मौजूद तमाम टाटा स्टील के अधिकारियों और कोरपोरेट जगत के लोगों के अलावा कई समाजसेवियों ने भी भागीदारी की और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मौके पर मौजूद टाटा स्टील के एम.डी. टी.वी. नरेन्द्रन ने कहा कि स्वर्गीय ईरानी का टाटा स्टील के विकास में अमूल्य योगदान था और उसे भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि आज टाटा स्टील जिस मुकाम पर है उसके पीछे उनका अहम् योगदान रहा है।

उनके दूरदर्शी सोच ने स्टील उद्योग को न केवल भारत में बल्कि विश्व मे आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि उनके चले जाने से पूरा टाटा घराना मर्माहत है।

श्री नरेन्द्रन ने कहा कि उनकी कमी को पूरा करना शायद ही संभव हो पाए।

ऐसे ही विचार पूर्व एमडी बी मुथुरामन के भी थे।

अपनी श्रद्धांजलि में उन्होंने अपने एक दिन पहले के कथन को दोहराया और कहा कि डॉ जमशेद ईरानी उन प्रमुख हस्तियों में से एक हैं जिन्होंने भारत के उदारीकरण के बाद के युग में भारतीय उद्योग की नींव रखने में मदद की। टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक के रूप में 1992 से और रतन टाटा, जिन्हें उस वक्त टाटा स्टील के चेयरमैन बने एक साल से भी कम समय हुआ था, दोनों 1991 में भारत के आर्थिक उदारीकरण के बाद “न्यू टाटा स्टील” के संस्थापक हैं।

उन्होंने कहा कि 1991 तक, सरकार द्वारा लंबे समय तक इसपर लगाए गए प्रशासनिक नियंत्रण, जो गवर्नेंस के अपने समाजवादी दर्शन पर आधारित था, के परिणामस्वरूप टाटा स्टील कमजोर, तकनीकी रूप से पुरानी, उच्च परिचालन लगत के साथ, बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद का अभाव और बहुत कम ग्राहक तथा बाजार में पैठ की कमी के माहौल से घिरी थी।  विश्व प्रसिद्ध कंसल्टेंट्स ने टाटा स्टील को “अप्रतिस्पर्धी और अस्थिर” करार दिया। 

केवल दस वर्षों के समय में, 1992 और 2001 के बीच, ईरानी ने रतन टाटा के समर्थन और मार्गदर्शन के साथ, टाटा स्टील के संचालन और व्यवसाय के सभी क्षेत्रों में पूर्ण परिवर्तन किया। 2001 तक, यह दुनिया में स्टील की सबसे कम लागत वाली  उत्पादक बन गयी। इसने कई पुरानी तकनीकों को नई तकनीकों और उपकरणों से बदल दिया।  ग्राहक और बाजार उन्मुखीकरण में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ। 90 के दशक के मध्य में उनके द्वारा “कस्टमर हर हाल में” एक स्लोगन बनाया गया।  कंपनी के उत्पादों और सेवाओं में व्यापक सुधार हुआ। संक्षेप में, 10 वर्षों की छोटी अवधि के भीतर “नई टाटा स्टील” की नींव रखी गई है।

मुथुरामन के अनुसार इसे कई पहलकदमियों  के माध्यम से प्राप्त किया गया था –  प्रक्रियाओं और उत्पादों की गुणवत्ता पर पैनी नजर,  लागत में भारी कमी, मैनपावर रैशनलाइजेशन और जनशक्ति की गुणवत्ता में सुधार, आधुनिक तकनीकों और उपकरणों को शामिल करने और आकांक्षात्मक एवं असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्यों को हासिल करने का प्रण और प्रयोग को प्रोत्साहित करने की संस्कृति का निर्माण करना आदि।  किसी भी समय, कंपनी भर में हजारों ‘सुधार परियोजनाएं’ होंगी, जिसमें सभी संवर्गों के कर्मचारी शामिल होंगे।  यह ईरानी थे, जिनका समर्थन और मार्गदर्शन रतन टाटा ने किया, जिन्होंने इन प्रयासों को “व्यावहारिक” तरीके से आगे बढ़ाया। 1991 में “अप्रतिस्पर्धी और  अन सस्टेनेबल ” के रूप में लिखी गई, टाटा स्टील 2001 तक, एक शानदार सुपरस्ट्रक्चर के निर्माण के लिए पर्याप्त नींव वाली कंपनी बन गई थी।

Condolence meeting at CFE for Dr Irani
सीएफई में डॉ. ईरानी को श्रद्धांजलि।

मुथुरामन ने कहा कि 1991 में, भारत के आर्थिक उदारीकरण के समय, भारतीय उद्योग की प्रक्रियाओं और उत्पादों में बहुत कम गुणवत्ता उन्मुखीकरण था।  जेजे ईरानी जापान के जेयूएसई के साथ समय व्यतीत करने वाले पहले भारतीय कॉर्पोरेट अधिकारियों में से एक थे और टीक्यूएम पर प्रारंभिक पाठ सीखकर वापस आए।  वह, भारतीय उद्योग के अन्य दिग्गजों के साथ, भारत में गुणवत्ता आंदोलन के बीजारोपण के सूत्रधार थे। तथ्य यह है कि गुणवत्ता अब टाटा स्टील के डीएनए में शामिल हो गई है और निरंतर सुधार, टाटा स्टील एवं जमशेदपुर में जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, इसका मुख्य कारण टाटा स्टील में अपने नेतृत्व के वर्षों में जेजे ईरानी द्वारा रखी गई नींव और रतन टाटा से उन्हें मिला मार्गदर्शन और समर्थन था।                     

बी मुथुरामन ने एक दिन पूर्व अपने संदेश में कहा था –  मुझे टाटा स्टील के रूपांतरण के समय के अपने बॉस की कमीं सताएगी।  टाटा स्टील को उनकी सलाह की कमी खलेगी।  जमशेदपुर के लोग, जिनके वे अभिन्न अंग बन गए थे, अपने बीच उनकी अनुपस्थिति को मसहूस करेंगे।

सीएफई में श्रद्धांजलि सभा में डॉ. ईरानी को याद किया गया।

 

 

 

 

यह भी पढ़ें

आदित्यपुर विद्युतनगर में रेल ट्रैक के किनारे मिट्टी धँसने से दो...

जमशेदपुर: सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर थाना अंतर्गत विद्युत नगर के समीप रेलवे लाइन के किनारे मिट्टी धंसने से दो महिलाओं की मौत हो...

उपायुक्त ने जन वितरण प्रणाली के विक्रेताओं के साथ बैठक की

प्रशासन ने विक्रेताओं सेे मृत व अयोग्य लाभुकों के बारे में सूचनाएँ माँगीं जमशेदपुर: जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित टाउन हॉल सभागार में मानगो नगर निगम...

अभिमत

6-दसबर-1992,-वह-दन-जस-दन-स-बदल-गय-थ-हनद-सहतय-पर-तरह,-बहन-लग-थ-वकत-वमरश-क-कवतए

6 दिसंबर 1992, वह दिन जिस दिन से बदल गया था...

0
सोनाली मिश्रा 6 दिसंबर 1992, एक ऐसा दिन, जिसने भारत की राजनीति की दिशा बदल कर रख दी थी। एक ऐसा दिन, जिसे लेकर राजनीति...
भगलपर-म-नलम-यदव-पर-शकल-क-हमल:-कट-हथ,-सतन-और-कन,-नलम-यदव-क-मतय

भागलपुर में नीलम यादव पर शकील का हमला: काटे हाथ, स्तन...

0
सोनाली मिश्रा बिहार में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो सभी का दिल दहला देने केलिए पर्याप्त है। पहले लोगों को लगता था कि...

लोग पढ़ रहे हैं

The greatness of our MOTHERLAND

0
Swami Vivekananda If there is any land on this earth that can lay claim to be the blessed Punyabhumi (holy land), to be the land...
why-does-a-film-like-kantara-become-a-hit-and-why-can’t-bollywood-make-such-films?

Why does a film like Kantara become a hit and why...

0
Kantara is a Kannada film. However, its dubbed Hindi version has also been received well by the audience in North and East India. What...

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी पढ़ें

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत

हमारा न्यूजलेटर सब्सक्राइब करें और अद्यतन समाचारों तथा विश्लेषण से अवगत रहें!

Town Post

FREE
VIEW